


Twins & Triplets
21 January 2026 को अपडेट किया गया
माँ बनना हर औरत का सपना होता है और लेकिन कुछ महिलाएं दिल से ये दुआ मांगती हैं कि उन्हें जुड़वा बच्चे हो जाएँ. क्या आप भी उन में से एक हैं और आपके मन में भी ये सवाल आता है कि जुड़वा बच्चे पैदा करने का तरीका क्या है? तो आइये इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे judwa bacche kaise hote hain और इस से जुड़ी कुछ अन्य जरूरी बातें.
जुड़वां बच्चे कैसे पैदा होते हैं
अक्सर आपने देखा होगा ट्विन बेबीज़ दो तरह के होते हैं. कई बार वो एक जैसे दिखते हैं और कई बार वो एक दूसरे से अलग दिखते हैं. मेडिकल टर्म्स में
एक जैसे दिखने वाले जुड़वां को ‘मोनोजायगोटिक ट्विंस’ या फिर ‘आइडेंटिकल ट्विंस’ कहा जाता है.
एक दूसरे से अलग दिखने वाले बच्चों को ‘डाइजाईगॉटिक ट्विंस’ या फिर ‘फ्रेटरनल ट्विन्स’ कहते हैं.
जब एक ही अंडा फ़र्टिलाइज होने के बाद दो में विभाजित होकर दो बच्चों का आकार लेने लगता है तो ऐसे भ्रूण आइडेंटिकल ट्विंस होते हैं जो जन्म के बाद एक जैसे दिखते हैं और दोनों ही या तो लड़के होते हैं या लड़की. लेकिन जब दो अलग-अलग अंडे दो अलग स्पर्म्स के साथ फ़र्टिलाइज हो कर दो भ्रूण बनाते हैं तो इन्हें फ्रेटरनल ट्विन्स कहा जाता है. इन बच्चों की शक्ल अलग-अलग होती हैं और इनमें से एक लड़का और एक लड़की होने की संभावना भी होती है.
जुड़वां बच्चे होने की सामान्य संभावनाएं
twins kaise hote hai ये जानने की इच्छा रखने वाले लोग अक्सर इस बात पर आश्चर्य करते हैं कि इस मामले में उनके खुद के ट्विन्स होने की संभावनाएं कितने प्रतिशत हैं. आपने यह भी सुना होगा कि ट्विन्स होना जेनेटिक फ़ैक्टर्स पर भी निर्भर करता है और यह सच है. जिन महिलाओं की मां या बहन के जुड़वां बच्चे होते हैं, उनके खुद के जुड़वां होने की संभावना भी लगभग दोगुनी होती है. एक अनुमान के अनुसार हर 250 प्रेग्नेंसी में से 1 ट्विन प्रेग्नेंसी होती है. एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार 1980 से 2009 तक ट्विन बेबीज बर्थ में 76% की बढ़त हुई है. जुड़वां गर्भधारण पूरी तरह संयोग होता है फिर भी कुछ ऐसे फ़ैक्टर्स हैं जो ट्विन्स होने की संभावना को बढ़ा सकते हैं. आइये जानते हैं जुड़वा बच्चे पैदा करने का तरीका जो पूरी तरह से प्राकृतिक है.
जुड़वां बच्चे पैदा करने के लिए प्राकृतिक तरीके
ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान ट्राई करें - एक साल या उससे ऊपर लगातार ब्रेस्ट फीडिंग कराने के बाद ट्राई करने पर आपकी ट्विन्स प्रेग्नेंसी हो सकती है. दरअसल ब्रेस्ट फीडिंग के दौरान शरीर प्रोलैक्टिन हॉर्मोन बनाता है जिससे जुड़वां होने की संभावना बढ़ जाती है.
बर्थकंट्रोल पिल्स बंद कर दें - इन दवाओं को बंद करने पर जैसे ही इनका प्रभाव खत्म होता है ओवरीज़ टेंशन फ्री होकर कुछ समय के लिए एक बार में एक से ज्यादा अंडे बनाने लगती हैं जिससे ट्विन्स होने के चांसेज बढ़ जाते हैं.
पति को ज़िंक रिच डाइट दें– ज़िंक, स्पर्म हेल्थ और मोर्टलिटी में मुख्य भूमिका निभाता है इसलिए अपने पति को ज़िंक से भरपूर चीज़ें जैसे अंडे, मटर, अखरोट, कद्दू के बीज आदि खिलाएं. इससे स्पर्म्स काउंट अधिक और स्ट्रॉंग होगा जो ज्यादा अंडों तक पहुंच सकते हैं.
पहली और दूसरी प्रेग्नेंसी में ज्यादा अंतर रखें – ट्विन्स के चांसेज बढ़ाने के लिए आपको दो प्रेगनेंसी के बीच कम से कम 2-3 साल का अंतर रखना चाहिए. इससे भी जुड़वा बच्चे होने की संभावना कुछ हद तक बढ़ जाती है.
35 वर्ष से ऊपर प्रेग्नेंसी प्लान करें – क्या आप जानते हैं 35 वर्ष या इससे अधिक उम्र में ओवरीज़ की एक बार में एक से ज्यादा अंडे बनाने की टेंडेंसी देखी जाती है. ऐसे में, 35 से अधिक उम्र में प्रेग्नेंसी होने पर आपके ट्विन्स होने की संभावना ज्यादा होती है.
वज़न बढ़ाएं – अधिक वजन वाली महिलाओं में भी जुड़वा बच्चे होने की संभावनायें बढ़ जाती हैं. इसके लिए आप हैल्दी फूड औपशन चुनें. दूध व दूध से बने प्रोडक्ट्स, अंडे व मीट खा कर स्वस्थ तरीके से आप अपना वेट बढ़ा सकती हैं.
जुड़वां बच्चे पैदा करने के लिए यौन संबंध की मुद्रा
आप को जान के आश्चर्य होगा कि कुछ खास तरह की सेक्स पोजीशन्स भी जुड़वा बच्चे पैदा करने का तरीका है.
कुछ खास सेक्स पोजीशन्स भी आपको ट्विन बेबीज़ कनसीव करने में मदद कर सकती हैं. इन में से कुछ मुख्य हैं डौगी स्टाइल, मिशनरी पोज़, साइड बाई साइड और एन्विल पोजिशन. इन सभी में स्पर्म्स सर्विक्स के पास बेहद पास या मुंह पर गिरते हैं जिससे उनका अंडों तक पहुंचना कुछ आसान हो जाता है और ट्विन्स होने की संभावना भी बढ़ जाती है.
जुड़वां बच्चे के साथ गर्भवती महिलाओं के लिए समस्याएं
ट्विन प्रेग्नेंसी में माँ की खास देखभाल होनी चाहिए ताकि कई सारे कौंप्लीकेशन्स को अवॉइड किया जा सके. जैसे कि,
हाई बीपी – ट्विन्स के साथ प्रेग्नेंट महिलाओं को अक्सर हाई बीपी की समस्या हो जाती है. इसे समय पर और सही तरह से कंट्रोल करना ज़रूरी है वरना इसका असर बच्चों पर भी पड़ता है.
जेस्टेशनल डाइबिटीज़ – अक्सर ट्विन् प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या भी शुरू हो जाती है.
प्री टर्म डिलीवरी – पांच में से तीन ट्विन् प्रेग्नेंसी में प्री मैच्योर डिलीवरी या अंडर डेव्लप्ड बच्चों के पैदा होने की संभावना रहती है.
एनीमिया –एनीमिया यानी खून की कमी प्रेग्नेंसी में आम है लेकिन ट्विन प्रेग्नेंसी के दौरान एनीमिया होने के चांसेज ज्यादा रहते हैं.
गंभीर बर्थ डिफ़ेक्ट्स – ट्विन प्रेग्नेंसी में गर्भ में पल रहे शिशुओं को स्पाइना बिफिडा या अन्य न्यूरल ट्यूब संबंधी समस्यायें भी हो सकती हैं.
मिसकैरेज का रिस्क – जुड़वां बच्चों को कनसीव करने के बाद कई बार लापरवाही या फिर अन्य दिक्कतों के चलते मिसकैरेज का खतरा भी बढ़ जाता है.
अगर आप भी ट्विन बेबीज के साथ प्रेग्नेंट हैं तो अपना खास ख्याल रखें और अगर आप अपने आँगन में जुड़वां बच्चों का सपना देख रही हैं और ये जानना चाहती हैं कि twins baby kaise hote h तो आप तुरंत ही हैल्दी लाइफस्टाइल और डाइट के साथ इन तरीकों को आजमाना शुरू कर दें. हमें उम्मीद है आपका सपना जल्दी ही पूरा होगा.
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Written by
Priyanka Verma
Priyanka is an experienced editor & content writer with great attention to detail. Mother to an 11-year-old, she's a ski
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