


Illnesses & Infections
28 May 2026 को अपडेट किया गया
छाला शिशु के मुंह में होने वाला एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन है. इनकी पहचान जीभ और गाल के अंदरूनी हिस्से में उभरे हुए सफेद निशान के रूप में की जाती है. शिशु के मुंह में छाले बहुत तकलीफदेह हो सकते हैं जो उनको दूध पीने में मुश्किल पैदा कर सकते है. इस ब्लॉग में नवजात के मुंह में छालों, उनकी पहचान और मौजूदा उपचार के विकल्पों के बारे में बताया जाएगा.
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जब शिशु के मुंह में छाले की बात आती है, इसे जानने के लिए कुछ खास लक्षण और संकेत होते हैं. शायद इसमें सबसे प्रमुख रूप में देखें तो बच्चे के जीभ पर उनके मुंह के अंदर की धुंधली तस्वीर है. इसके साथ ही लालिमा, दर्द और भूख ना लगाना भी है. शिशु के मुंह में छाले के अन्य लक्षणों में शामिल हैं:
अगर अभिभावक को यह अंदेशा होता है कि उनके शिशु के मुंह में छाले हैं, तो ये जरूरी है कि डॉक्टरी सलाह ले ली जाए. हालांकि यह कोई गंभीर स्थिति नहीं है, लेकिन मुंह में छाले छोटे बच्चे के लिए तकलीफदेह हो सकते हैं, और अगर इसे नज़रअंदाज किया जाए तो समस्या बढ़ सकती है.
नवजात के मुंह में छाले की सबसे आम वजह केंडिडा आलबिकान्स फंगस है. यह फंगस अमूमन मुंह के अंदर मौजूद रहता है, लेकिन ये आमतौर पर परेशानी की वजह नहीं बनता. हालांकि कुछ हालात में ये फंगस बेतहाशा रूप में बढ़ सकते हैं. शिशु के मुंह में छाले की सबसे खास वजह ये हैं:
जिन शिशुओं का एंटीबायोटिक्स के ज़रिए इलाज होता है उनके मुंह में छाले हो जाते हैं. यह इसलिए होता है क्योंकि एंटीबायोटिक्स केंडिडा फंगस को नियंत्रित करने वाले सहायक बेक्टीरिया को मार देते हैं. जिससे फंगस को बढ़ने में मदद मिलती है और इस कारण संक्रमण होता है.
चुसनी और बच्चों की बोतलों पर बेक्टीरिया या अन्य जीव विकसित हो सकते है. अगर ये चीजें सही से साफ नहीं की जाएं, तो वो मुंह में केंडिडा फंगस को दावत दे सकते हैं, जिससे शिशु के मुंह में छाले हो सकते हैं.
शिशु मुंह में छाले की सबसे आम वजह उनकी कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है. चूंकि नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होती है, इसलिए वे ऐसे यीस्ट के संक्रमण के लिए अति संवेदनशील होते हैं.
जिनको पहले से ही संक्रमण हों अगर बच्चे उनके संपर्क में आते हैं तो उनमें छाले निकाल आते हैं. इसमें स्तनपान कराने वाली मां भी शामिल है, अगर उनका निप्पल संक्रमित है तो इससे शिशु के मुंह में छाले हो सकते हैं.
आमतौर पर छालों को उनके लक्षणों से पहचाना जाता है. डॉक्टर शिशु के मुंह में उन लक्षणों को देखता है. कुछ मामलों में डॉक्टर बच्चे के मुंह की लार को माइक्रोस्कोप से जाँचता है. केंडिडा फंगस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए इस नमूने को तैयार भी किया जा सकता है.
शिशु के मुंह में छाला होना एक बहुत ही सामान्य रूप से होने वाला मुंह का संक्रमण है. यह जीवन के लिए घातक नहीं है लेकिन फिर भी शिशु के लिए बहुत ही दर्द भरा और तकलीफदेह होता है. इसकी वजह से दूध पीने में भी परेशानी होती है. शिशुओं में मुंह के छालों का निदान आमतौर पर बहुत आसान होता है. संक्रमण एक या दो हफ्ते में बिना दवा के अपने आप सही हो जाता है. फिर भी, अगर संक्रमण अपने आप ठीक होता नहीं दिख रहा हो तो सही उपचार से यह लगभग 10 दिनों में ठीक हो जाता है.
मुंह के छाले एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन हैं जो आमतौर पर शिशुओं में देखे जाते हैं. लेकिन अच्छी खबर ये है की आज नवजात शिशुओं के मुंह के छालों के उपचार के लिए बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं. इसमें सबसे प्रचलित एंटी फंगल दवाइयों का कोर्स है, जो जेल, बटी या गोली के रूप में दी जा सकती है. ज़्यादा गंभीर स्थिति में एंटी फंगल दवाइयों को नसों के ज़रिए दिए जाने की जरूरत होती है. अधिकांश मामलों में मुंह के छाले उपचार के बाद एक या दो हफ्ते में ठीक हो जाते हैं. अगर बड़ा बच्चा हो तो डॉक्टर बच्चे की डाइट में प्रोबायोटिक शामिल करने की सलाह देते हैं. प्रोबायोटिक में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया फंगल इन्फेक्शन को जल्दी दूर करने में मदद करते हैं.
यहां आमतौर पर अपनाए जाने वाले कुछ टिप्स बताए जा रहे हैं जो शिशुओं के मुंह के छालों को होने से रोकने में सहायक होते हैं:
अगर शिशु के मुंह में छालों के लक्षण एक हफ्ते तक माउथ जेल लगाने के बाद भी दिख रहे हों और बच्चे को नियमित रूप से मुंह के छाले हो जाते हों तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं. डॉक्टर बच्चे की हालत और लक्षणों की गंभीरता को ध्यान में रख कर उचित इलाज की योजना बना कर आपकी मदद करेगा.
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Written by
Parul Sachdeva
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