


Fertility Problems
16 January 2026 को अपडेट किया गया

Medically Reviewed by
Dr. Shruti Tanwar
C-section & gynae problems - MBBS| MS (OBS & Gynae)
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इनफर्टिलिटी आज के समय की एक सबसे बड़ी समस्या है जो महिलाओं और पुरुषों को लगभग समान रूप से प्रभावित कर रही है. खराब लाइफस्टाइल, देर से शादी, प्रदूषण, स्ट्रेस और अनहेल्दी डाइट इनफर्टिलिटी के मुख्य कारण हैं. वैसे, अच्छी बात ये है कि आजकल लोग इस बारे में जागरूक होने लगे हैं और खास तौर पर लाइफस्टाइल को लेकर अलर्टनेस बढ़ी है. डॉक्टरों के अनुसार अगर एक साल तक अनप्रोटेक्टेड सेक्स करने के बाद भी गर्भधारण न हो पाये तो उसे इनफर्टिलिटी (infertility in hindi) का लक्षण माना जाता है और ज़रूरी टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है ताकि समस्या की असली वजह का पता चल सके.
किसी भी अन्य टेस्ट की तरह फर्टिलिटी टेस्ट भी लैब में किये जाते हैं जिनमें अलग-अलग तरीक़ों से महिला और पुरुष की प्रजनन क्षमता को चेक करने के साथ ही उनकी चाइल्ड बेयरिंग केपेसिटी (childbearing capacity) को भी जाँचा जाता है. महिलाओं के लिए ये पैरामीटर उनके हार्मोन्स का स्तर, ओवरी और उसके अंडे बनाने की क्षमता, एग्स की क्वालिटी, ट्यूब्स में रुकावट और यूटरस के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं जबकि पुरुषों के लिए स्पर्म काउंट, स्पर्म मोटिलिटी के अलावा रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स को चेक किया जाता है. इन टेस्ट से फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के सही ऑप्शन चुनने में मदद मिलती है.
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फर्टिलिटी टेस्ट उन कपल्स को करवाने की सलाह दी जाती है जिन्हें गर्भधारण में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा हो. सामान्यतः इन टेस्ट को तब करवाया जाता है जब
अब बात करेंगे महिलाओं (Female fertility test) के लिए किए जाने वाले कुछ टेस्ट की.
महिलाओं में रिप्रोडक्टिव सिस्टम से जुड़े कई टेस्ट किए जाते हैं जैसे कि-
इस टेस्ट में फोलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) और एंटी मलेरियन हार्मोन (AMH) की जाँच के द्वारा ओवरी में एग्स की संख्या और क्वालिटी को चेक किया जाता है.
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ओव्यूलेशन के पैटर्न और वेजाइनल डिस्चार्ज की जाँच के लिए ओव्यूलेशन मॉनिटरिंग या बेसल बॉडी टेम्परेचर से जुड़े टेस्ट किए जाते हैं.
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हिस्ट्रोसल्पिंग्राम (hysterosalpingogram), फेलोपियन ट्यूब डायनामिक टेस्ट (Fallopian Tube Dynamic Test`) और हिस्टेरोसाल्पिंगो-कंट्रास्ट सोनोग्राफी (HyCoSy) जैसे टेस्ट के द्वारा फेलोपियन ट्यूब्स में रुकावट या संक्रमण को चेक किया जाता है.
इसमें महिलाओं के हार्मोन जैसे कि प्रोजेस्टेरोन, एस्ट्रोजन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH), और प्रोलैक्टिन असंतुलन की जाँच की जाती है.
यूरीन संक्रमण, यूरीन से संबंधित बीमारियाँ या अन्य इन्फेक्शन की जाँच के लिए ये टेस्ट किया जाते हैं.
आइये अब जानते हैं पुरुषों के लिए (male fertility test) किए जाने वाले फर्टिलिटी टेस्ट के बारे में.
इसे मेल इनफर्टिलिटी की जाँच का प्रथम चरण माना जा सकता है जिसमें स्पर्म काउंट, मोबिलिटी, मोर्फोलॉजी यानी कि आकार और अन्य पैरामीटर; जैसे- वॉल्यूम और पीएच की जाँच की जाती है.
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हार्मोन टेस्टिंग में टेस्टोस्टेरोन (testosterone), फोलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (follicle- stimulating hormone), ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और प्रोलैक्टिन (prolactin) की जाँच की जाती है.
जेनेटिक टेस्टिंग में स्पर्म बनाने की क्षमता को प्रभावित करने वाली किसी जेनेटिक समस्या या क्रोमोसोमल डिसऑर्डर (chromosomal disorders) की जाँच करते हैं.
इससे टेस्टीकल्स के स्ट्रक्चर, साइज़ और वरिकोज़ल यानी कि टेस्टीकल्स के बढ्ने पर फूली हुई हुई नसों (enlarged veins in the scrotum) जैसी किसी असामान्यता की जाँच की जाती है.
इस टेस्ट में स्पर्म निकलने के बाद के यूरिन का सेंपल लेकर देखा जाता है कि क्या उसमें स्पर्म मौजूद हैं? इस स्थिति को रेट्रोगेट इजेकुलेशन (retrograde ejaculation) कहा जाता है जिसमें स्पर्म पेनिस से बाहर आने के बजाय ब्लेडर में वापस चला जाता है.
महिलाओं (female fertility test) और पुरुषों दोनों के लिए फर्टिलिटी टेस्ट (male fertility test) करने से पहले डॉक्टर निम्नलिखित फ़ैक्टर्स को ध्यान में रखते हैं;
कई मामलों में दवाओं के उपयोग से फर्टिलिटी को बढ़ाने और रिप्रोडक्टिव सिस्टम को मज़बूत करने में मदद मिलती है .
इन विट्रो फर्टिलिजेशन (IVF), इंट्रासाइटोप्लास्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI), इंट्रायूट्रिन इनसेप्शन (IUI) जैसी तकनीक जिससे गर्भधारण कराया जा सके.
हार्मोनल थेरेपी जिससे ओवरी में एग की क्वालिटी को बढ़ाने के साथ ही पुरुषों में स्पर्म क्वान्टिटी में भी सुधार लाया जा सकता है.
गर्भाशय में सिस्ट, नसबंदी या ट्यूब से संबंधित दोष होने पर सर्जरी की मदद ली जाती है.
एलोपेथी के अलावा आयुर्वेदिक या होमियोपैथी जैसी अलटरनेटिव चिकित्सा पद्धतियों से भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने में मदद मिल सकती है जिससे गर्भधारण की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है.
संतान सुख हर एक की चाह होती है लेकिन अगर प्रेग्नेंसी ना पाये तो आप निराश ना हों क्योंकि लेटेस्ट मेडिकल टेक्नोलोजी के द्वारा आपकी समस्या का समाधान संभव है. अपनी लाइफस्टाइल में ज़रूरी बदलाव करें और फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलकर अपनी समस्या का निदान करवाएँ.
1. Hwang K, Lipshultz LI, Lamb DJ. (2011). Use of diagnostic testing to detect infertility.
2. Sunder M, Leslie SW. (2023). Semen Analysis. [Updated 2022 Oct 24].
3. Pelzman DL, Hwang K. (2021). Genetic testing for men with infertility: techniques and indications.
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