


Male Infertility
29 May 2026 को अपडेट किया गया
स्पर्म क्रैम्प- एक ऐसा विषय है, जो सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है. लेकिन यह एक आम समस्या है और यह समस्या किसी भी पुरुष को हो सकती है. चलिए इस आर्टिकल के ज़रिये आपको डिटेल में बताते हैं कि आख़िर यह स्पर्म क्रैम्प क्या होता है, किन कारणों से होता है और इसके क्या लक्षण होते हैं! साथ ही, आपको बताएँगे कि इस समस्या से बचने के लिए आपको किन उपायों पर ग़ौर करना चाहिए.
स्पर्म क्रैम्प- कुछ लोगों के लिए बिल्कुल नया हो सकता है. हो सकता है कि आपने भी यह शब्द पहली बार सुना हो. लेकिन यह समस्या बहुत ही आम है. स्पर्म क्रैम्प यानी कि 'वीर्य का दर्द'. जब किसी पुरुष को टेस्टिकल एरिया (अंडकोष क्षेत्र) में दर्द या क्रैम्प महसूस होते हैं, तो इसे स्पर्म क्रैम्प कहा जाता है. यह एक प्रकार का टेस्टिकुलर पेन (Testicular pain meaning in Hindi) होता है.
स्पर्म क्रैम्प होने के कई कारण (Testicular pain causes in Hindi) हो सकते हैं. यहाँ हम आपको कुछ मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं.
टेस्टिक्युलर टॉरशन एक गंभीर समस्या हो सकती है. इस स्थिति में टेस्टिकल में ब्लड सप्लाई बंद हो जाती है, जिसके कारण टेस्टिकल में दर्द या क्रैम्प महसूस होने लगते हैं. ऐसी स्थिति में डॉक्टर से तुरंत परामर्श करना ज़रूरी हो जाता है.
इस स्थिति में टेस्टिकल के आसपास संकुचन या सूजन आ जाती है. इसके कारण भी दर्द और क्रैम्प महसूस हो सकते हैं. अक्सर इसका कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है.
वेरिकोसेल एक वेंस की समस्या है, जिसमें टेस्टिकल्स की वेंस में बदलाव आता है. इसके कारण भी क्रैम्प और दर्द महसूस हो सकता है. इतना ही नहीं, वेरिकोसेल के कारण स्पर्म प्रोडक्शन में भी दिक्कत हो सकती है.
कभी-कभी टेस्टिकल्स में इंफेक्शन होने के कारण भी स्पर्म क्रैम्प महसूस होने लगते हैं. इस इंफेक्शन के कारण दर्द के साथ डिसकंफर्ट भी हो सकता है.
टेस्टिकल (अंडकोष) क्षेत्र पर चोट लगने के कारण भी क्रैम्प महसूस होने लगते हैं. यह चोट किसी भी प्रकार की घटना या खेल-कूद के दौरान लगी हो सकती है.
स्पर्म क्रैम्प किसी भी पुरुष को हो सकती है. इसलिए ज़रूरी है कि समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाये. यहाँ हम आपको स्पर्म क्रैम्प के कुछ कॉमन लक्षणों के बारे में बताने जा रहे हैं.
स्पर्म क्रैम्प का एक मुख्य लक्षण होता है- टेस्टिकल (अंडकोष) क्षेत्र में दर्द या डिसकंफर्ट महसूस होना. यह दर्द हल्का और गंभीर दोनों हो सकता है. इसलिए टेस्टिकल में होने वाले किसी भी दर्द को नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.
स्पर्म क्रैम्प के समय टेस्टिकल या उसके आस-पास की नसों में संकुचन या सूजन महसूस हो सकती है. सूजन होने पर टेस्टिकल की त्वचा लाल हो सकती है और इसे छूने पर दर्द भी महसूस होने लगता है. अगर आपको इस प्रकार की कोई समस्या होती है, तो डॉक्टर से मिलने में बिल्कुल भी देरी न करें.
स्पर्म क्रैम्प के समय यूरिन पास करने या इजैक्यूलेशन (वीर्य स्खलन) के दौरान जलन या दर्द का अनुभव होता है. इस समस्या को बिल्कुल भी नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह अन्य मेडिकल कंडीशन का भी संकेत हो सकता है.
स्पर्म क्रैम्प के कारण पेट या ग्रोइन (पेट के निचले हिस्से और जाँघ के बीच के भाग) में दर्द हो सकता है. यह दर्द हल्का भी हो सकता है और गंभीर भी. इसका असर आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ सकता है. अगर आपको लगता है कि आप इस तरह के दर्द से गुज़र रहे हैं, तो डॉक्टर से मिलने में बिल्कुल भी देरी न करें.
कुछ मामलों में टेस्टिकल के आकार में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. टेस्टिकल का साइज़ छोटा या बड़ा दिख सकता है.
ऊपर बताए गए लक्षण सिर्फ़ स्पर्म क्रैम्प की ओर ही इशारा नहीं करते हैं; बल्कि ये अन्य किसी मेडिकल कंडीशन के कारण भी महसूस हो सकते हैं. इसलिए इन लक्षणों को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि आगे चलकर यही लक्षण कई तरह के कॉम्प्लिकेशन का कारण बनते हैं.
स्पर्म क्रैम्प एक आम समस्या है, लेकिन फिर भी पुरुष इस विषय पर बात करने में शर्म महसूस करते हैं. चलिए अब आपको बताते हैं कि स्पर्म क्रैम्प से बचने के लिए आपको किन बातों पर ग़ौर करना चाहिए!
स्पर्म क्रैम्प से बचने का सबसे पहला क़दम यह है कि आप जो भी पहनें वह सुरक्षित हो. अगर आप किसी खेल-कूद या फिजिकल एक्टिविटी में शामिल होते हैं, तो यह ज़रूरी है कि आप कम्प्रेशन शॉर्ट्स वगैरह पहनें.
स्पर्म क्रैम्प से बचने का एक तरीक़ा यह भी है कि आप सुरक्षित सेक्स पर ज़ोर दें. सेक्स के दौरान कॉन्डोम का इस्तेमाल करें. कॉन्डोम का उपयोग करने से सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिसीज (एसआईटी) और स्पर्म क्रैम्प का रिस्क नहीं रहता है.
आप ख़ुद भी नियमित तौर पर अपनी बॉडी को चेक करते रहें. अगर आपको टेस्टिकल में किसी प्रकार का बदलाव महसूस होता है, तो किसी अनुभवी डॉक्टर से बात करें.
अपने प्राइवेट पार्ट्स की सफ़ाई का विशेष ध्यान रखें. प्राइवेट पार्ट्स की हाइजीन के लिए साफ़ पानी का उपयोग करें. ऐसा करने से न सिर्फ़ स्पर्म क्रैम्प का रिस्क कम होगा; बल्कि अन्य बीमारियों का खतरा भी कम हो जाएगा.
इसे भी पढ़ें: स्पर्म मोटिलिटी का क्या होता है फर्टिलिटी से कनेक्शन?
अगर आपने कभी स्पर्म क्रैम्प का सामना किया है, तो आप समझ सकते हैं कि इस समस्या से कितनी तकलीफ़ होती है. यहाँ हम आपको कुछ ऐसे उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप इस समस्या से राहत पा सकते हैं.
स्पर्म क्रैम्प होने की स्थिति में आपको आराम की ज़रूरत होती है. जब भी आपको स्पर्म क्रैम्प हो, तो सबसे पहले आप लेट जाएँ और अपने पैरों को ऊपर की ओर उठाएँ. इससे दर्द कम होता है.
दर्द को कम करने के लिए आप ठंडे या गर्म कंप्रेशन की मदद ले सकते हैं. ठंडा कम्प्रेशन दर्द में ठंडक देता है और गर्म कम्प्रेशन दर्द को कम करता है. दर्द होने की स्थिति में आप 10 से 15 मिनट के लिए इस कंम्प्रेशन का उपयोग कर सकते हैं.
अधिक दर्द महसूस होने की स्थिति में आप दर्द निवारक दवाई का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. लेकिन ध्यान रखें कि आपको यह दवाई डॉक्टर की सलाह से ही लेना है.
कई बार टाइट या गिलास शेप अंडरवियर पहनने से भी स्पर्म क्रैम्प को बढ़ावा मिलता है. ऐसे में सपोर्टिव अंडरवियर पहनें. इससे आपको दर्द से राहत मिल सकती है.
दर्द को कम करने के लिए आपको स्पर्म क्रैम्प के ट्रिगर से भी बचना ज़रूरी है. इसका मतलब यह है कि आप शराब, सिगरेट या तनाव से दूर रहें.
इसे भी पढ़ें: स्पर्म काउंट कम होने पर दिखते हैं इस तरह के संकेत!
अपनी सेहत का ध्यान रखें. अगर आपको किसी भी तरह का टेस्टिक्युलर पेन या डिसकंफर्ट महसूस होता है, तो बिल्कुल भी लापरवाही न करें और अपने डॉक्टर से परामर्श करें. ध्यान रखें संकेतों को समझकर ही सही इलाज हो सकता है.
1. Velasquez J, Boniface MP, Mohseni M. (2023). Acute Scrotum Pain.
2. Leslie SW, Sajjad H, Siref LE. (2023). Chronic Testicular Pain and Orchalgia.
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Written by
Jyoti Prajapati
Jyoti is a Hindi Content Writer who knows how to grip the audience with her compelling words. With an experience of more
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